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4 साल की बच्ची को आखिरी बार देखने के लिए तड़प रहे थे मां-बाप, डॉक्टर ने वीडियो कॉल पर दिखाया अंतिम संस्कार

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जयपुर के सबसे बड़े अस्पताल सवाई मानसिंह में कोरोना से मरने वालों के शव के दर्शन इन दिनों वीडियो कॉल पर करवाए जा रहे हैं। ऐसा एक दो नहीं बल्कि छह बार हो चुका है।

9 मई को जयपुर में एक चार साल की बच्ची की कोरोना से मौत हो गई थी। बच्ची के माता-पिता महज 500 मीटर की दूरी पर थे। वे एसएमएस हॉस्पिटल के कोरोना वॉर्ड क्वारैंटाइनथे, जहां उनका ट्रीटमेंट भी चल रहा थाऔर बच्ची की बॉडी हॉस्पिटल की ही मरचुरी में रखी थी।

कुछ कदम की दूरी के बावजूद वे बच्ची के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकते थे। संक्रमण के खतरे को देखते हुए उन्हें बाहर निकलने की इजाज़त नहीं दी गई।

लेकिन मां-बाप किसी भी हाल में अपनी लाडली को आखिरी बार देखना चाहते थे। मां का रो-रोकर बुरा हाल था। इसके बाद डॉक्टर्स ने उन्हें वीडियो कॉल के जरिए पूरा अंतिम संस्कार दिखाया और फोटो भेजीं।

एसएमएस हॉस्पिटल के डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेंसिक मेडिसीन में एसोसिएट प्रोफेसर और डेड बॉडी मैनेजमेंट का जिम्मा संभाल रहे डॉक्टर सुमंत दत्ता के मुताबिक इसकी शुरूआत अप्रैल में ही कर दी थी।

एक मृतक का चेहरा वीडियो कॉल पर परिजनों को दिखाते डॉक्टर।

पहला मामला 17 अप्रैल का है। जब 22 साल के एक लड़के की मौत हो गई थी। घरवालों से जब बात की तो पता चला कि मरने वाले के दोनों भाई भी कोरोना पॉजिटिव हैं जोउसी अस्पताल में क्वारैंटीन में हैं।

जबकि मां-पिता और बाकी लोग उत्तरप्रदेशमें थे। उनका आना मुमकिन नहीं था। इसलिए फोटो भेजकर पहले मरनेवाले लड़के की पहचान करवाई और फिर पुलिस वालों ने उसके परिवार वालों को अंतिम संस्कार वीडियो कॉल पर दिखाया।

इसके बाद अस्पताल के फॉरेंसिक मेडिसीन डिपार्टमेंट के डॉक्टर्स ने फैसला किया की वह ऐसे हर मामलों में अंतिम दर्शन वीडियो कॉल से जरूर करवाएंगे।

18 अप्रैल को एक दूसरे व्यक्ति की मौत हुई थी जिसके पिता के पास स्मार्ट फोन भी नहीं था। वह अपने बेटे को आखिरी बार देखना चाहते थे।

हॉस्पिटल के एक डॉक्टर ने दूसरे डॉक्टर को फोन लगाया और पिता को बेटे का शव दिखाया। बेटे का शव और पिता एक ही अस्पताल में थे।

26 अप्रैल को एक बुजुर्ग महिला, 29 अप्रैल को जौहरी बाजार के एक आदमी और 3 मई को एक दूसरे व्यक्ति की मौत के बाद अंतिम संस्कार और शव के दर्शन उनके परिवार वालों ने वीडियो कॉल पर ही किए।

जिन मृतकों के परिजन आ नहीं पाते, उन्हें मोबाइल के जरिए आखिरी बार दर्शन करवा दिए जाते हैं।

कोई भी अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो सका। उन सभी का अंतिम संस्कार मेडिकल टीम ने किया, क्योंकि पूरा परिवार क्वारैंटाइन में था।
यदि परिजन क्वारैंटाइन नहीं होते तब भी उन्हें बॉडी को आखिरी बार पांच से छह फीट दूर से ही दिखाया जाता है।

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