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दिल्ली में स्टेशन के बाहर निकलते ही खत्म हो गई सोशल डिस्टेंसिंग, सिर्फ गेट से निकलने के लिए आरपीएफ जवान ने लाइन लगवाई

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निजामुद्दीन स्टेशन से लाइव रिपोर्ट,

भोपाल एक्सप्रेस सुबह करीब सवा आठ बजे दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर पहुंच गई थी। ट्रेन से उतरने में यात्रियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया। हालांकि गेट के पास आरपीएफ के जवान तैनात थे, जिस कारण यहां लाइन में लगाकर लोगों को बाहर किया गया।

लेकिन बाहर निकलते ही यात्री फिर एक साथ जुटने लगे। हर किसी ने मास्क पहना था लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग कोई फॉलो नहीं कर रहा था। टैक्सी चालक चार-चार, पांच-पांच यात्रियों को एक साथ बिठाकर ले गए। गाड़ियों में बैठते वक्त सोशल डिस्टेंसिंग की फ्रिक न ही वाहन चालक ने की और न ही यात्रियों ने इस बारे में कुछ सोचा।

जबलपुर, बेंगलुरू और भोपाल से दिल्ली आने वाली ट्रेनों में कई ऐसे लोग आए हैं, जो महीनों से इधर-उधर फंसे थे। अपने राज्य की सीधी ट्रेन न मिलने के चलते ये लोग पहले दिल्ली आए और यहां से दूसरी ट्रेन पकड़कर अपने घरों को जा रहे हैं।

भोपाल में पिछले तीन साल से आईएएस की तैयारी कर रहे रिषभ भूटानी भी भोपाल एक्सप्रेस से मंगलवार सुबह निजामुद्दीन पहुंचे। रिषभ ने बताया कि, मैं भोपाल में नेहरू नगर में किराया का कमरा लेकर रहता था। लॉकडाउन के बाद से खाने-पीने की बहुत दिक्कत हुई। मैंने कई दिनों तक थाने में जाकर दोनों टाइम खाना खाया है। वहां से पैकेट मिल जाते थे।

रिषभ जयपुर के रहने वाले हैं। दिल्ली से राजस्थान रूट की ट्रेन पकड़कर जयपुर पहुंचेंगे। बोले मेरे पिताजी एक बार मुझे लेने आए थे लेकिन वे आगरा से आगे नहीं बढ़ सके। अब मैं पढ़ाई जयपुर में रहकर ही करूंगा। भोपाल नहीं आऊंगा।

जबलपुर से दिल्ली पहुंची संगीता वर्मा ने बताया कि, मेरा तीन साल का बच्चा है। वो अपने पापा के साथ दिल्ली में था और मैं अकेली जबलपुर में फंस गई थी। बच्चे के बिना एक-एक पल काटना मुश्किल हो गया। जैसे ही रिजर्वेशन शुरू हुए, सबसे पहले सीट बुक की। करीब ढाई महीने बाद आज अपने बच्चे से मिल पाऊंगी।

बेंगलुरू से दिल्ली पहुंचे बलबीर सिंह हमें निजामुद्दीन स्टेशन के बाहर मिले। पूछा कहां जा रहे हैं तो बोले, सर राजस्थान जाना है लेकिन वहां की सरकार को तो न ट्रेन बर्दाश्त है न जहाज। बोले, मैं बेंगलुरू में मार्बल का बिजनेस करता हूं। पूरा परिवार हिंडन में रहता है। लॉकडाउन के पहले ही दो महीने से घर नहीं गया था। फिर सब बंद हो गया।

मैंने 1 जून की फ्लाइट की टिकट बुक करवाई थी लेकिन 31 मई को दोपहर में मैसेज आया कि आपकी फ्लाइट कैंसिल हो गई है। पैसा भी रिफंड नहीं मिलेगा। आप चाहें तो टिकट आगे बढ़वा सकते हैं। मैंने 6 हजार रुपए में टिकट बुक की थी। इसके बाद तुरंत बेंगलुरू से दिल्ली वाली ट्रेन में रिजर्वेशन करवाया। यहां से हिंडौल की ट्रेन से उससे करीब 6 माह बाद अपने परिवार के पास जाऊंगा।

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पहली रिपोर्ट :भोपाल से दिल्ली, ट्रेन का सफर / आरपीएफ-जीआरपी जवानों को देखते ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते दिखे लोग, उन्हें डर था कि यात्रा से ना रोक दिया जाए

दूसरी रिपोर्ट :भोपाल से दिल्ली, ट्रेन का सफर / पहली बार इस ट्रेन की आधी सीटें खालीं, डर इतना किलोग आपस में बात करने से भी बच रहे थे

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ये तस्वीर दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन की है। यहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने के लिए जगह-जगह मार्किंग तो की गई है, लेकिन लोग हैं कि एक-दूसरे से सटकर ही खड़े हैं।