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एजुकेशन टेक्नोलॉजी कंपनी अनअकेडमी 3 साल के लिए आईपीएल की पार्टनर बनी, 11 दिन पहले ड्रीम-11 को 222 करोड़ रु. में टाइटल स्पॉन्सरशिप मिली थी

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने बेंगलुरु की एजुकेशन टेक्नोलॉजी कंपनी अनअकेडमी को आईपीएल का ऑफिशियल पार्टनर बनाया। बोर्ड ने शनिवार को इसकी घोषणा की। अनअकेडमी 2020 से 2022 तक यानी अगले तीन साल आईपीएल की पार्टनर रहेगी। 11 दिन पहले ही गेमिंग फर्म ड्रीम-11 को 222 करोड़ रुपए में आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप दी थी। ये कॉन्ट्रैक्ट 18 अगस्त से 31 दिसंबर 2020 तक के लिए है।

आईपीएल चेयरमैन बृजेश पटेल ने कहा कि हम अनअकेडमी को 2020 से 2022 तक आईपीएल के ऑफिशियल पार्टनर के रूप में चुनकर काफी खुश हैं। उन्होंने कहा कि आईपीएल भारत में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली क्रिकेट लीग है और हमारा मानना है कि भारतीय एजुकेशन कंपनी के नाते अनअकेडमी दर्शकों की आकांक्षाओं पर काफी पॉजिटिव असर डाल सकती है। खासतौर पर वे लाखों युवा जो अपना करियर संवारने में लगे हैं।

कंपनी ने भी बीसीसीआई से पार्टनरशिप होने पर खुशी जताई

आईपीएल का ऑफिशियल पार्टनर बनने पर अनअकेडमी ने एक बयान जारी कर कहा कि हम इस पार्टनरशिप से काफी खुश हैं। अनअकेडमी में बड़ा ब्रांड है और इसने भारत में एजुकेशन और लर्निंग में अपने इनोवेशन की मदद से तमाम सीमाएं तोड़ दी हैं।

अनअकेडमी ने आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए बोली लगाई थी

चाइनीज मोबाइल कंपनी वीवो के हटने के बाद आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए बोली लगाने वाली कंपनियों में अनअकेडमी और बायजू भी शामिल थी। बायजू ने 210 करोड़ रुपए और अनअकेडमी ने टाइटल स्पॉन्सरशिप हासिल करने के लिए 170 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी। लेकिन इस रेस में ड्रीम-11 सबसे आगे रही और उसे आईपीएल 2020 के टाइटल राइट्स मिले।

इस कंपनी में भी चीन का पैसा लगा है। चीन की टेक कंपनी टैंसेंट ने 2018 में ड्रीम-11 में 10 करोड़ डॉलर (720 करोड़ रुपए) का निवेश किया था।

बीसीसीआई ने ड्रीम-11 में टैंसेंट के निवेश की अनदेखी के पीछे यह दलील दी थी कि यह देसी कंपनी है। इसके फाउंडर हर्ष जैन और भावित सेठ समेत 400 से ज्यादा कर्मचारी भारतीय हैं। टैंसेंट के पास सिर्फ 10% शेयर हैं। ड्रीम-11 सिर्फ भारतीय यूजर्स के लिए है।

बोर्ड ने टाइटल स्पॉन्सरशिप की रकम 90 करोड़ रुपए कम की
वीवी से करार खत्म करने के बाद बीसीसीआई ने भारतीय कंपनियों को लुभाने के लिए स्पॉन्सरशिप की रकम को पहले की तुलना में कम कर दिया था। पहले यह रकम 440 करोड़ रुपए सालाना थी। बोर्ड ने नई बिडिंग के लिए रकम घटाकर 350 से 300 करोड़ रुपए सालाना कर दी थी। हालांकि, ड्रीम-11 को टाइटल स्पॉन्सरशिप 222 करोड़ रुपए में ही मिली।

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गलवान घाटी में भारतीय जवानों की शहादत के बाद बीसीसीआई ने चाइनीज मोबाइल कंपनी वीवो से टाइटल स्पॉन्सरशिप की डील रद्द कर दी थी। इसके बाद ड्रीम-11 को 4 महीने के लिए स्पॉन्सर चुना गया। -फाइल